यूजीसी क़ानून पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद ब्राह्मण समाज ने किया गंगा का दुग्धाभिषेक,खून से लिखे पत्र

यूजीसी क़ानून पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद ब्राह्मण समाज ने किया गंगा का दुग्धाभिषेक,खून से लिखे पत्र

यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी रोक लगा दी है। इसके बाद धर्मनगरी हरिद्वार में आज ब्राह्मण समाज के लोगों द्वारा मां गंगा की पूजा अर्चना और दुग्धाभिषेक किया गया और मां गंगा से प्रार्थना की गई कि जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट ने उक्त नियम को हटाए जाने की बात कही है उसी तरह मां गंगा भारत सरकार और यूजीसी के लिए बनाई गई 51 सदस्यों की कमेटी को भी सद्बुद्धि दे और इस फैसले को वह भारत सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करे और यूजीसी कानून को पूर्णतः समाप्त करें।

निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर वेदमूर्ति गिरी ने कहा यूजीसी पर सवर्ण समाज के नेताओं के मुंह में दही जम गई थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसका संज्ञान लिया और काले कानून पर रोक लगा दी। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में ऐसा कानून लाया गया, तो स्वर्ण समाज के लोग पिंडदान भी करेंगे। आज खून से भी पत्र लिखे गए हैं और अगर इस पर पूर्णतः रोक नहीं लगाई गई लाखों करोड़ो खून से पत्र लिखे जाएँगे।

श्री अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि यूजीसी के खिलाफ जो भारत में जगह जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं उसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला लिया है, वह स्वागत योग्य है। आज इसी कड़ी में उनके द्वारा मां गंगा का दुग्धाभिषेक किया गया। मां गंगा सुप्रीम कोर्ट की तरह भारत सरकार और यूजीसी कमेटी को भी सद्बुद्धि दे। और यह जो काला कानून जबरदस्ती हम पर थोपा जा रहा था उसको पूर्णतः समाप्त करें।

वहीं ब्राह्मण समाज से आचार्य पवन कृष्ण शास्त्री ने कहा कि यूजीसी को लाकर सरकार ने स्वर्ण समाज पर कुठाराघात किया है, उसे बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जा सकता। अभी हमारे द्वारा सांकेतिक विरोध किए गए, यदि आगे भी भविष्य में इस कानून को लागू किया गया तो स्वर्ण समाज चुप नहीं बैठेगा। हम अपने बच्चों के भविष्य को इस काले कानून का शिकार नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि इस तरह के कृत्य से सरकार स्वर्ण समाज नहीं बल्कि अन्य समाज पर भी नए नए कानून थोपने का कार्य कर रही है, जिससे समाज में भेदभाव की स्थिति बनी रहे। यदि यह काला कानून फिर से थोपा गया तो ब्राह्मण समाज उग्र आंदोलन करेगा।