कुंभ 2027 से पहले अखाड़ा परिषद विवाद गरमाया

कुंभ 2027 से पहले अखाड़ा परिषद विवाद गरमाया

उज्जैन से हुई दावेदारी पर निरंजनी अखाड़े का पलटवार ,श्रीमहंत रविंद्र पुरी बोले—“देश जानता है असली अखाड़ा परिषद कौन”

धर्मनगरी हरिद्वार में वर्ष 2027 में प्रस्तावित कुंभ मेले से पहले ही अखाड़ा परिषद को लेकर विवाद तेज होता जा रहा है। संत समाज के दो प्रमुख धड़ों के बीच नेतृत्व को लेकर खींचतान खुलकर सामने आ गई है, जिससे आगामी कुंभ की व्यवस्थाओं और संतों की एकजुटता पर सवाल उठने लगे हैं।

हाल ही में उज्जैन में महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा अपने साथ आठ अखाड़ों का समर्थन होने का दावा करते हुए खुद को अखाड़ा परिषद घोषित करने के बाद यह विवाद और गहरा गया है। इस दावे के बाद अब निरंजनी अखाड़े की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है।

उज्जैन की घोषणा पर उठा विवाद

बताया जा रहा है कि उज्जैन में आयोजित एक भंडारे के दौरान महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से यह घोषणा की गई कि उनके साथ कई अखाड़े जुड़ चुके हैं और उन्होंने खुद को अखाड़ा परिषद के रूप में प्रस्तुत किया। इस कदम को संत समाज के भीतर नेतृत्व की दावेदारी के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, इस घोषणा के तुरंत बाद अन्य अखाड़ों की ओर से असहमति के स्वर भी सामने आने लगे, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि मामला अभी पूरी तरह सुलझा नहीं है।

रविंद्र पुरी का जवाब—“प्रचार के लिए दिया गया बयान”

निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर दैनिक भास्कर ऐप से बातचीत में तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उज्जैन में दिया गया बयान केवल प्रचार पाने का प्रयास है।

उन्होंने कहा यह बात किसी से छिपी नहीं है कि वास्तविक अखाड़ा परिषद अध्यक्ष कौन है। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक और उत्तर से लेकर दक्षिण तक हर कोई जानता है कि अखाड़ा परिषद का नेतृत्व किसके पास है।”

पुरी ने आगे कहा कि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष का चयन एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत होता है और कोई भी व्यक्ति या अखाड़ा स्वयं को घोषित नहीं कर सकता।

पुराना है विवाद, कई दावेदार मैदान में

श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने स्पष्ट किया कि यह विवाद नया नहीं है, बल्कि लंबे समय से चला आ रहा है। उन्होंने कहा कि कई लोग अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष बनना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए एक तय प्रक्रिया है।

“हर कोई अध्यक्ष बनना चाहता है, लेकिन इसके लिए नियम और परंपरा है। उसी के तहत चयन होता है,” उन्होंने कहा।

“सभी अखाड़े हमारे साथ”—पुरी का दावा

महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा आठ अखाड़ों के समर्थन का दावा किए जाने पर भी पुरी ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिन अखाड़ों के नाम लिए गए हैं, उनसे उनकी व्यक्तिगत बातचीत हुई है और उन्होंने स्पष्ट किया कि वे वास्तव में निरंजनी अखाड़े के साथ हैं।

“फोन पर बातचीत में उन्होंने कहा कि उनका नाम बिना सहमति के जोड़ दिया गया है, जबकि वे हमारे साथ हैं,” पुरी ने दावा किया।

कुंभ 2027 की तैयारियों पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विवाद जल्द नहीं सुलझा, तो इसका असर कुंभ 2027 की तैयारियों पर पड़ सकता है। अखाड़ा परिषद संतों का सबसे बड़ा संगठन माना जाता है, जिसकी भूमिका कुंभ मेले के आयोजन में बेहद अहम होती है।

अखाड़ों के बीच तालमेल और एकजुटता ही कुंभ की सफलता की कुंजी मानी जाती है। ऐसे में नेतृत्व को लेकर विवाद संत समाज के भीतर विभाजन की स्थिति पैदा कर सकता है