जन्मशताब्दी महोत्सव में पहुँचे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, हजारों दीपों के बीच गूँजा विश्व कल्याण का संदेश

जन्मशताब्दी महोत्सव में पहुँचे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, हजारों दीपों के बीच गूँजा विश्व कल्याण का संदेश
जन्मशताब्दी समारोह के मंच से “वसुधैव कुटुंबकम्“ का उद्घोष
हजारों जगमगाते दीपकों की साक्षी में राष्ट्र जागरण और मानव कल्याण का संकल्प


इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा आयोजित परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी के जन्मशताब्दी महोत्सव में रविवार को केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की गरिमामयी उपस्थिति रही। हजारों दीपों की जगमगाहट, आध्यात्मिक चेतना और सामूहिक संकल्प के बीच समारोह से ‘वसुधैव कुटुंबकम् – वन वर्ल्ड, वन फैमिली’ का संदेश गूँजा। युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य एवं वंदनीया माताजी के आदर्शों को समर्पित इस महोत्सव में राष्ट्र जागरण, सामाजिक समरसता और विश्व कल्याण की भावना प्रमुखता से उभरी।


इस अवसर पर केन्द्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि आज श्रद्धा, सेवा और संकल्प का दिन है। जिस तरह 100 का अंक पूर्णांक का प्रतीक होता है, उसी तरह यह वर्ष भी पूर्णांक की भांति है। भारतीय आध्यात्मिक यात्रा के लिए भी पूर्णांक का वर्ष है। श्री शाह ने कहा कि यह केवल धार्मिक एवं आध्यात्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि मंत्रों में समाहित सकारात्मक ऊर्जा को आत्मसात कर मनुष्य के भीतर विद्यमान सत् तत्व और श्रेष्ठ संभावनाओं को शत-प्रतिशत अभिव्यक्त करने का एक सशक्त राजमार्ग है। यह साधना मनुष्य की अंतर्निहित चेतना को जागृत कर उसके व्यक्तित्व, विचारों और कर्मों को सकारात्मक दिशा प्रदान करने का माध्यम है। उन्होंने परम पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी को भारतीय अध्यात्म का एक महान चिकित्सक बताते हुए कहा कि गुरुदेव ने गायत्री मंत्र की शक्ति और महत्ता को जन-जन तक पहुंचाकर विशेष रूप से युवाओं को आध्यात्मिक चेतना से प्रेरित किया। लगभग 15 करोड़ परिवारों को गायत्री मंत्र से जोड़कर उसे मानवता के कल्याण का माध्यम बनाने का जो विराट अभियान चलाया गया, वह भारतीय आध्यात्मिक परंपरा की दिग्विजय का शंखनाद है। गुरुदेव का यह प्रयास अध्यात्म को जनजीवन से जोड़ने और समाज में सकारात्मक चेतना का विस्तार करने की एक ऐतिहासिक पहल है।
जन्मशताब्दी समारोह के दलनायक एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि यह समय राष्ट्र के जागरण का है। अपनी संकीर्णताओं से ऊपर उठकर व्यापक दृष्टि से सोचने और समाज के लिए कार्य करने का यह अलभ्य अवसर है। जब भारत जागेगा, तभी विश्व जागेगा। उन्होंने व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण और राष्ट्र निर्माण के संकल्पों को जीवन में उतारने का आह्वान किया।
इससे पूर्व समारोह के विभिन्न सत्रों में दिल्ली के उपराज्यपाल श्री तरनजीत सिंह संधू, केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार, केंद्रीय मंत्री श्री दुर्गादास उइके, केंद्रीय मंत्री डॉ. चन्द्रशेखर पेम्मासानी, चर्च ऑफ इंग्लैंड के एंग्लिकन बिशप राइट रेवरेंड लूसा, ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य लॉर्ड रसेल रुक एवं लॉर्ड क्रिश रावल, इस्कॉन बेंगलुरु के प्रमुख स्वामी मधु पंडित दास, आध्यात्मिक गुरु स्वामी ज्ञानानंद, मेदांता हॉस्पिटल के अध्यक्ष डॉ. नरेश त्रेहान, विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष श्री आलोक कुमार तथा बीएपीएस के साधु भद्रेश स्वामी, पद्मश्री सत्यनारायण उनवल सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों ने सहभागिता की।
समारोह के दलनायक डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने अतिथियों को गायत्री मंत्र लिखित चादर, रुद्राक्ष माला, गंगाजली एवं युग साहित्य भेंटकर सम्मानित किया। इस अवसर पर अनेक प्रशासनिक अधिकारियों सहित देश-विदेश से आए गायत्री साधकों की उपस्थिति रही। वहीं हजारों जगमगाते दीपों के बीच सामूहिक संकल्प ने जन्मशताब्दी महोत्सव को आध्यात्मिक जागरण, राष्ट्रीय चेतना और विश्व बंधुत्व का प्रेरणादायी स्वरूप प्रदान किया।