यज्ञ की मूल भावना परमार्थ है
यज्ञ की मूल भावना परमार्थ है। धरती-अम्बर, अग्नि, पवन-प्रकाशादि के रूप में परमात्मा स्वयं भी पारमार्थिक कार्यों में ही संलग्न है। परमार्थिक वृतियों के रक्षण, यज्ञादि शुभ-कर्मों के संपादन एवं विश्व-कल्याण के निमित्त भगवान श्रीदत्तात्रेय एवं भगवान महामृत्युंजय की अनुग्रह-स्थली तथा श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़ा के आचार्यपीठ श्रीहरिहर आश्रम, कनखल,Continue Reading
















