एआई के दौर में डेमोक्रेसी पर महामंथन, देसंविवि में जुटे देश-विदेश के विशेषज्ञ
युवाओं को टेक्नोलॉजी से प्रेम करना सीखना चाहिए: राज्यपाल
भारत की ज्ञान परंपरा तकनीकी विकास को हमेशा मानव कल्याण से जोड़कर देखती रही: डॉ. चिन्मय पण्ड्या
एआई का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचना चाहिए: डेक्स हंटर टोरिक
समिट में एआई आधारित पत्रिका सहित अनेक पुस्तकों का हुआ विमोचन
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आज केवल तकनीक नहीं, बल्कि शासन और समाज के भविष्य को प्रभावित करने वाली शक्ति बन चुकी है। ऐसे समय में एआई का उपयोग मानवता और लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त बनाने के लिए कैसे हो, इसे लेकर देव संस्कृति विश्वविद्यालय में मंगलवार को ‘एआई फॉर डेमोक्रेसी’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय समिट आयोजित हुआ। देश-विदेश के विशेषज्ञों ने एआई के बढ़ते प्रभाव, अवसरों, चुनौतियों और इसके जिम्मेदार उपयोग पर मंथन किया। समिट में एआई आधारित पत्रिका सहित अनेक पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।

समिट के समापन सत्र के मुख्य अतिथि माननीय राज्यपाल श्री गुरमीत सिंह जी ने कहा कि यह परिवर्तन का क्षण है। भारत में लोकतंत्र की परंपरा युगों पुरानी है और अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) लोकतंत्र को अधिक सशक्त, पारदर्शी और सहभागी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हमें एआई की सकारात्मक संभावनाओं का लाभ उठाते हुए इसका उपयोग जनहित और राष्ट्रहित में करना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि युवाओं को टेक्नोलॉजी से प्रेम करना सीखना चाहिए, क्योंकि तकनीक उनके लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलने का अवसर प्रदान करती है। युवाओं की रचनात्मक सोच, तकनीकी दक्षता और मानवीय संवेदनाओं का समन्वय भारत को नई दिशा दे सकता है। राज्यपाल ने कहा कि प्रश्न केवल यह नहीं है कि मशीन कितनी बुद्धिमान हो सकती है, प्रश्न यह है कि हम उसका उपयोग कितनी समझदारी से करते हैं।





इस दौरान अपने वीडियो संदेश में लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने कहा कि एआई के विकास के साथ लोकतांत्रिक संस्थाओं के सामने नई संभावनाएं और चुनौतियां दोनों सामने आ रही हैं। एआई का उपयोग पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी बढ़ाने के साथ लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि तकनीक का विकास मानव हित और लोकतांत्रिक मूल्यों को केंद्र में रखकर किया जाना जरूरी है। लोकसभा में भी एआई का उपयोग किया जाता है।
समिट की अध्यक्षता कर रहे देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा तकनीकी विकास को हमेशा मानव कल्याण से जोड़कर देखती रही है। एआई को मानव बुद्धि का विकल्प नहीं, बल्कि मानव क्षमता के विस्तार का माध्यम बनाना होगा। उन्होंने कहा कि ‘मानवीय मूल्यों से जुड़ा एआई ही लोकतंत्र को अधिक संवेदनशील, समावेशी और जनकेंद्रित बना सकता है।’ लंदन स्थित सेंटर फॉर टुमौरों के संस्थापक अध्यक्ष मिस्टर डेक्स हंटर टोरिक ने कहा कि एआई का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए तकनीकी विकास के साथ सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों पर भी ध्यान देना जरूरी है। सरकार, उद्योग और समुदाय मिलकर ऐसी तैयारी करें, जिससे एआई समान अवसर, मानव कल्याण और समावेशी विकास का आधार बने।
विशेषज्ञों ने एआई, लोकतांत्रिक संस्थाओं, सार्वजनिक नीति, नागरिक भागीदारी, डिजिटल विश्वसनीयता और भविष्य की शासन व्यवस्था से जुड़े विभिन्न सत्रों में विचार साझा किए। इस अवसर पर एआई फार डेमोक्रेसी पर आधारित विभिन्न प्रतियोगिता के विजेताओं को अतिथियों ने सम्मानित किया गया। समिट में आईपीयू जेनेवा की महासचिव सुश्री एण्डा फिलिप, द ब्रिटिश यूनिवर्सिटी इन इजिप्ट के डीन प्रोफेसर इब्राहिम सलामा, द सेंटर फॉर टुमॉरो के संस्थापक अध्यक्ष तथा एआई और पब्लिक पॉलिसी विशेषज्ञ डेक्स हंटर टोरिके, ब्रिटिश हाई कमीशन नई दिल्ली के प्रमुख-टेक पॉलिसी हैरी फिशर, स्वामी राम हिमालयन विवि के कुलाधिपति डॉ विजय धस्माना, केबीनेट मंत्री श्री मदन कौशिक, मनु गौड सहित देश-विदेश के विशेषज्ञों ने भाग लिया।












