राम मंदिर के बाद बद्रीनाथ-केदारनाथ दान विवाद: साध्वी ऋतम्भरा बोलीं— ‘किसी के पतन का जश्न नहीं, समाधान ढूंढिए’
साध्वी ऋतम्भरा ने कहा कि यदि गंगा तट पर कोई भ्रष्ट व्यक्ति श्रद्धालुओं की आस्था का दोहन करता है, तो उससे गंगा या तीर्थ के प्रति श्रद्धा कम नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं पर रोक तभी लगेगी जब दोषियों को कड़ा दंड मिलेगा। उन्होंने समाज से अपील करते हुए कहा कि बच्चों को भारतीय संस्कृति और संस्कारों के गंगाजल से सींचना होगा, तभी ऐसे मामलों पर अंकुश लगाया जा सकेगा।
वहीं निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी ने कहा कि बद्रीनाथ मंदिर में सामने आए मामले के बाद जांच के आदेश दिए गए हैं और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस मामले को लेकर पूरी तरह संवेदनशील हैं और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
स्वामी कैलाशानंद गिरी ने यह भी कहा कि देश के मंदिरों का संचालन सरकार के बजाय संतों, भक्तों और स्वतंत्र ट्रस्टों के माध्यम से होना चाहिए। उनके अनुसार गठित एसआईटी की जांच से पूरे मामले में पारदर्शिता सामने आएगी।
इधर वरिष्ठ संत साध्वी निरंजन ज्योति ने भी कहा कि मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि जहां भी अनियमितता मिलेगी, वहां दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि धर्म के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और हर मामले का खुलासा होना चाहिए।











